वन्दे मातरम्।

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मुस्लिम आक्रामकों और शासकों द्वारा हिन्दुओं का बलात्‌ धर्म परिवर्तन भाग: 4

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अल-काजवीनी के अनुसार ‘जब महमूद सोमनाथ के विध्वंस के इरादे से भारत गया तो उसका विचार यही था कि (इतने बड़े उपसाय देवता के टूटने पर) हिन्दू (मूर्ति पूजा के विश्वास को त्यागकर) मुसलमान हो जायेंगे।(२१)

दिसम्बर १०२५ में सोमनाथ का पतना हुआ। हिन्दुओं ने महमूद से कहा कि वह जितना धन लेना चाहे ले ले, परन्तु मूर्ति को न तोड़े। महमूद ने कहा कि वह इतिहास में मूर्ति-भंजक के नाम से विखयात होना चाहता है, मूर्ति व्यापारी के नाम से नहीं। महमूद का यह ऐतिहासिक उत्तर ही यह सिद्ध करने के लिये पर्याप्त है कि सोमनाथ के मंदिर को विध्वंस करने का उद्‌देश्य धार्मिक था, लोभ नहीं।

मूर्ति तोड़ दी गई। दो करोड़ (२०,०००,०००) दिरहम की लूट हाथ लगी, पचास हजार (५००००) हिन्दू कत्ल कर दिये गये।(२१क)

लूट में मिले हीरे, जवाहरातों, सच्चे मोतियों की, जिनमें कुछ अनार के बराबर थे, गजनी में प्रदर्शनी लगाई गई जिसको देखकर वहाँ के नागरिकों और दूसरे देशों के राजदूतों की आँखें फैल गई।(२२)
spgu_somnath[1]



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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

bharodiya के द्वारा
July 5, 2011

आज मे महमद गजनवी खूद हिन्हु गद्दार जो बचे हुए हिन्दु मन्दिरो पर कबजा किए जा रहे है । लूटे हुए खजाने का टी..वी. मे प्रदर्शन करते है । नास्तिक पत्रकारो के मुहमे लार टपकने लगती है जैसे खजाना उन के बाप का हो । जबतक हिन्दु प्रजा कमजोर रहेगी तबतक ऐसे गजनवी आते रहेन्गे और मन्दिर का धन विदोशो मे जाता रहेगा । पहेले आरब देश मे जाता था अब स्विस देश मे जाता है ।


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